Padmanabhaswamy temple के सातवें दरबाजे का रहस्य।



भारत को कभी सोने की चिड़िया कहा जाता था। इस चिड़िया को लूटने के लिए समय-समय पर अनेक लुटेरों ने अपना हाथ आजमाया। महमूद गजनबी ने तो विशेष तौर पर इसे अपना निशाना बनाया। केहते है कि वह अपने साथ-साथ देश का बहुत बड़ा खजाना लुठकर ले गया। कितना ले गया, इसका आकंलन करना तो बहुत मुश्किल है। लेकिन इन सबके बावजूद भी कोई शक नहीं कि भारत आज भी सोने की चिड़िया है। दक्षिण भारत के तिरुअनंतपुरम में स्थित shree padmanabhaswamy temple इसका बड़ा उदाहरण है। आपको यह जानकर हैरानी होगी, कि इस मंदिर में इतना बड़ा खजाना मौजूद है कि इससे भारत की डगमगाए अर्थव्यवस्था को दो से ज्यादा वार ठिक किया जा सकता है। मंदिर में मिला धन दिल्ली पंजाब और राजस्थान के बजट के बराबर है। मंदिर में मिले अरबों रुपयों से देश भर में 290 Super Special Hospital का निर्माण कराया जा सकता है। इन पैसों से 14000 किलोमीटर highway का निर्माण हो सकता है। देश में खेलों को बढ़ाने के लिए दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम जैसे 1000 बेहतरीन स्टेडियम बनाए जा सकते हैं। इस मंदिर के पीछे की कहानी काफी रोचक और रहस्यमई है। आज हम  इस विषय पर चर्चा करेंगे और जानेंगे padmanabhaswamy temple के खजाने और उसके रहस्य के बारे में।


भारत का एक प्रांत केरल, जिसकाराजधानी है तिरुवनंतपुरम। मलयालम यहां की मुख्य भाषा है। हिंदुओं तथा मुसलमानों के अलावा इहां ईसाई भी बड़ी संख्या में रहते हैं। देवताओं की नगरी के नाम से मशहूर इस शहर को महात्मा गांधी ने सदाबहार शहर की संज्ञा दी थी। padmanabhaswamy temple तिरुवनंतपुरम में स्थित भगवान विष्णु का प्रसिद्ध हिंदू मंदिर है। कहा जाता है कि 10 वीं शताब्दी में इस मंदिर का निर्माण कराया गया था। हांलाकि कहीं कहीं इस मंदिर के 16 वीं शताब्दी में निर्मित होने का जिक्र भी है। लेकिन इह काफी साफ है कि लगभग 400 साल पहले यानी 1750 में त्रावणकोर साम्राज्य के संस्थापक थे राजा मार्तंड वर्मा। उन्होंने अपनी यूद्ध नीति से आसपास के कई क्षेत्रों को मिलाकर त्रावणकोर साम्राज्य को एक व्यावसायिक क्षेत्र में परिवर्तित कर दिया। जहां दूर-दूर से लोग आयुर्वेदिक औषधियां, स्वादिष्ट मशाला खासकर काली मिर्च खरीदने के लिए कीमती जवाहरात और स्वर्ण मुद्राएं लेकर भारत आते थे। मसालों के व्यापार से राज्य को काफी फायदा होता था। कुछ ही वर्षों में राजा मार्तंड वर्मा के पास इतनी अधिक संपत्ति इकट्ठा हो गई कि मंदिर के खजाने और वैभव की कहानियां दूर-दूर तक फैलने लगी। माना जाता है कि मार्तंड वर्मा ने पुर्तगाली समुद्री बेड़े और उसके खजाने पर भी कब्जा कर लिया था। लेकिन अब उसे अपने खजाने की सुरक्षा को लेकर भय सताने लगा, और सन 1750 में राजा मार्तंड वर्मा ने राजा के पद से मुक्त होकर शासन को दैवीय स्वीकृति दिलाने के लिए अपना राज्य भगवान को समर्पित करते हुए स्बयं को भगवान विष्णु का आजीवक सेवक घोषित कर दिया। सबसे पहले उनके पास जितनी भी संपत्ति थी उसको जमीन के नीचे गुप्त द्बार बनवाकर एकत्रित कर दिया। फिर ईन गुप्त ठिकानों को आधार बनाते हुए इसके चारों तरफ मंदिर का निर्माण किया गया, और मंदिर के गर्भ गृह के ठीक ऊपर भगवान विष्णु के पद्मनाभ नामक मुद्रा की मूर्ति स्थापित की गई। 1790 में टीपू सुल्तान ने मंदिर पर कब्जे की कोशिश की थी, लेकिन कोच्चि में उसे हार का सामना करना पड़ा।

भारत के प्रमुख वैष्णव मंदिरों में शामिल इह ऐतिहासिक मंदिर तिरुवनंतपुरम के अनेक पर्यटन स्थलों में से एक है। पूर्वी किले के अंदर स्थित इस मंदिर का परिसर बहुत विशाल है। जिसका एहसास इसका सात मंजिला गोपुरम देखकर हो जाता है। केरल और द्रविडियन वास्तुशिल्प में निर्मित यह मंदिर दक्षिण भारतीय वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है। इस मंदिर के भीतर सिर्फ हिंदू धर्म के लोग ही प्रवेश कर सकते हैं। प्रवेश करने के लिए पुरुषों को सफेद धोती एवं स्त्रीओ को साड़ी पहनना अनिवार्य है। मंदिर की खूबसूरती को देखकर सभी के मन में भक्ति भाव का संचार सदा ही जागृत हो जाता है। यह मंदिर भारत देश के सबसे पुराने मंदिरों और सबसे अमीर मंदिरों में से एक है। साथ ही दुनिया के कुछ रहस्यमई जगह में इस मंदिर की गिनती होती है। दरअसल, यहां ऐसे कई रहस्य है जिन्हे कई कोशिशों के बाद भी लोग सुलझा नहीं पाए हैं। इस मंदिर का सातवां दरवाजा हर किसी के लिए पहेली बना हुआ है। कहा जाता है कि इस दरवाजे को नागबन्धम् इय़ा नागपाशम् मंत्रों का प्रयोग कर बंद किया गया है। आइए जानते हैं आखिर क्या है इस सातवें दरवाजे का रहस्य।

 70 साल के एक बुजुर्ग, भारतीय गुप्तचर विभाग यानी आईबी के पूर्व आईपीएस अधिकारी, T P Sundararajan ने सन 2007 में अकल्पनीय काम किया। उन्होंने हाईकोर्ट में मंदिर की संपत्ति को सार्वजनिक करने के लिए एक याचिका दाखिल की। जिसके बदौलत मंदिर के गर्भ गृह में बने तहखाने को खोलने का आदेश जारी किया गया। और फिर कितना खजाना मिला जिसके बारे में कुछ लोगों का आकंलन है कि वह 100000 करोड रुपए से अधिक का है। 30 जून 2011 को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर 7 लोगों की समिति बनाई गई । T P Sundararajan इन 7 सदस्य समिति में से एक था। समिति ने मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करके वहां पर उपलब्ध सात दरवाजों का मुआयना किया। 1 महीने के बाद यानी 31 जुलाई 2011 को न्यायालय ने इन दरवाजों को खोलकर संपत्ति का मूल्यांकन करने का आदेश जारी किया। मंदिर के भुरे ग्रेनाइट फर्श के 5 फुट नीचे उन तहखानों के दरवाजे खोलने पर हजारों फ्रान्सिसि और डाच सोने के सिक्के सोने के कई सारे आभूषण, स्वर्ण मुद्राएं,सोने के धागों से बने वस्त्र, सोने की मूर्तियां और बर्तन कई बड़ी बोरियों में हीरे, हीरो से जड़ित जेवर, रूबी, पन्ना, बहुमूल्य रत्न और प्राचीन सोने के बर्तन मिले। मंदिर अधिकारियों ने उस खजाने की कीमत लगभग 120000 करोड रुपए आंकि।वही इन सात तहखानों में से एक खाना ऐसा भी है जो आज तक रहस्य बना हुआ है। दरअसल यब समिति ने इस आखरि दरवाजे यानी चेम्वर B को खोलने गई तो वे कामयाब नहीं हो पाए। यह दूसरों से कुछ खास था। वहां तीन दरवाजे मौजूद थे। पहला दरवाजा छड़ो से बना लोहे का दरवाजा था। समिति ने उसे खोला तो उसके पीछे एक और लकड़ी से बना भारी दरवाजा था, और जब दूसरी लकड़ी के दरवाजे को खोला गया तो वहां एक और लोहे से बना बड़ा ही मजबूत दरवाजा निकला जिसे खोला नहीं जा सकता था। आखिरी दरवाजे पर ताले भी नहीं लगाए गए हैं। उसमें कोई कुंडी तक नहीं है। उस दरवाजे पर नाग की डरावनी आकृतियां बनी है। चेतावनी देती है कि यदि इस दरवाजे को खोला गया तो अंजाम बहुत बुरा होगा। मंदिर के सेवकों का कहना है कि इस दरवाजे को एक मंत्र से बंध किया गया है, जिससे अष्टनाग बंधन मंत्र इय़ा नागपाशम् मंत्र कहते हैं। मगर यह मंत्र क्या है, कोई नहीं जानता। वहां के पंडितों का कहना है, की उस चेम्बर के अंदर जो भी है, बो अनोखे श्राप से ग्रसित है। अगर कोई उसके अंदर जबरदस्ती जाने की कोशिश भी करता है तो वह बीमार हो जाता है, या फिर अपनी जान से हाथ धो बैठता है। अब इसे इत्तेफाक कहे या फिर कुछ और पर आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इस तहखाने के कक्षों को खोलने के 3 हफ्ते बाद ही T P SUNDARARAJAN यानी वह जिन्होंने अदालत में उन दरवाजों को खुलवाने की याचिका दायर की थी, बह पहले बीमार पड़े फिर उनकी मौत हो गई। अगले ही महीने मंदिर के सेवकों ने यह चेतावनी जारी कर दी कि यदि किसी ने उस आखरि कक्षों को खोलने की कोशिश की, उसका अंजाम बहुत बुरा होगा। लेकिन इन सब धार्मिक मान्यताओं के नजरिए को एक तरफ रख कर दरवाजे के ना खुलने के रहस्य को समझा जाए तो सर्वेक्षन करने पर समिति को ऐसा लगा कि चेंबर B का निर्माण बाकी दरवाजों की सुरक्षा के लिए किया गया है। उन्होंने उस लोहे के नाग वाले दरवाजे पर कान लगाकर शुनने कि कोशिश की तो उन्हें दरवाजे की दूसरी तरफ से पानी की आवाज आई जिसके चलते उन्होंने यह निष्कर्ष निकाला कि यदि इस दरवाजे को खोला गया तो वहां से पानी का रिसाव तेजी से शुरू हो जाएगा। कुछ ही मिनटों में पूरे गर्भ ग्रह में पानी भरने लगेगा, जिससे मंदिर जमीन में धंस सकता है और कुछ ही पल पूरा मंदिर टूट कर तेहस-नेहस हो सकता है। मंदिर के इतिहासकारों ने बताया कि इस तरह के सुरक्षा दरवाजों का निर्माण इस लिये किया गया होगा ताकि यदि कोई वहारि ब्याक्ति  मंदिर पर आक्रमण करके खजाने को हासिल करना चाहे तो इस दरवाजे को खोलकर मंदिर को ध्वस्त किया जा सके और मंदिर का अनमोल खजाना किसी के हात ना लोगों। कुछ लोंगो का मानना है कि सातबां दरवाजा आपको भगवान तक ले जाता है। और कुछ कहते हैं कि दरवाजे के पीछे एक रहस्यमई नाग है यो भगवान विष्णु का सेवक है। जिसके अनन्त नाग नाम से पुकारा जाता है।

यह सब तो लोगों की बनाई मान्यताएं और मनगढ़ंत कहानियां है। असल में कोई पुख्ता तौर पर नहीं जानता इस दरवाजे के पीछे क्या है? आप लोगों की इस पर क्या राय है हमें कमेंट बॉक्स में कमेंट करके जरूर बताएं। Blog अच्छा लगा हो तो प्लीज इसे whatsapp or facebook पर शेयर करें।


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