हाजारों साल पुरानी Technology को देख के Scientist के होस उड़ गए। यो आज भी बनाना मुमकिन नहीं। anticathirum mechanism



दोस्तो आज के दौर में दुनिया काफी तेजी से चलती हुई हमें दिखाई देती है। हमारे कामों को आसान बनाने के लिए साइंस ने कई सारे टेक्नोलॉजी और फैसिलिटीज हमारे समाज के लिए बनाया है । आज से 15 या 20 साल पहले अगर कोई कहता कि हम घर बैठे किसी दूसरे देश में बैठे इंसान को देख सकते हैं या उससे बात कर सकते है तो शायद सब उसे पागल कहते थे , लेकिन कुछ ही सालों में साइंस ने बहुत ही ज्यादा तरक्की कर ली है इसीलिए आज के दौर में ये मुमकिन है । लेकिन अगर मैं आपसे कहूं कि इसी तरह के टेक्नोलॉजी आज से कई हजारों साल पहले मौजूद थी तो शायद आपको यकीन नहीं आएगा । आज के इस blog में हम आपको ऐसे ही कुछ चीजें दिखाएंगे जो हमसे भी उन्नत किसी सभ्यता ने हजारों साल पहले ही धरती पर बना दी थी , और जिन्हें इंसान आज भी नहीं बना सकता ।

उन्नीस सदी में ग्रीस के एंटीकाथेरा आइलैंड के किनारे एक आर्कियोलॉजिस्ट पुराने चीजों की खोज में समंदर में डाइव करके प्राचीन समय की चीजें ढूंढ रहा था । तभी उसे समंदर की तह में एक बड़ा सा टूटा और डूबा हुआ जहाज मिला । उस समंदर में डूबे हुए जहाज में काफी सारी पुरानी और कीमती चीजें मिली । ये एक पुराना रोमांस का शिप था जो शायद कई सालों पहले इस जगह पड़ा हुआ था । वही पे एक पुराना उड़न बॉक्स भी था जिसमें अलग अलग तरह की ज्वेलरी पुराने पॉटरी और मार्बल के स्टैच्यू थे ।


लेकिन इसके साथ ही उस आर्कियोलॉजिस्ट को एक बहुत ही अजीब सी चीज मिली । एक ऐसी चीज जिसे कई पुराने आर्कियोलॉजिस्ट और पिस्टोरियस ने पहले कभी नहीं देखा था । एक ऐसी चीज जिसने सभी हिस्टोरियन को प्राचीन समय के इतिहास के बारे में फिर से दुबारा सोचने पर मजबूर कर दिया । ये एक पीतल से बनी छोटी घड़ी जैसी कोई चीज थी जो इतने छोटे आकार में होने के बावजूद भी उसमें कई सारे मेकेनिज्म दिखाई दे रहे थे । रिसर्चर्स को इस चीज का नाम भी नहीं पता था इसलिए उन्होंने इसका नाम एंटीकाथेरा मैकेनिजम रखा । यूके उस आईलैंड का नाम है जिसके पास ये चीज उन्हें मिली थी लेकिन उनको यह पता नहीं था कि ये क्या चीज है और क्या काम करती है । कई सालों तक दुनिया भर के अलग अलग आर्कियोलॉजिस्ट रिसर्चर्स और हिस्टोरियन ने इस चीज पर रिसर्च की लेकिन उन्हें यह पता नहीं चल पाया कि आखिर ये क्या चीज है या फिर ये काम क्या करती है । कई सालों बाद जब इसके बारे में कुछ भी पता नहीं चला तो उन्होंने एंटीकाथेरा मैकेनिजम को ग्रीस के म्यूजियम में रख दिया । लेकिन आज के दौर में जब इतने टेक्नोलॉजी और साइंस बहुत तरक्की कर चुका है तो रिसर्चर्स ने सोचा कि एंटीकाथेरा मैकेनिजम को अच्छे से एनालाइज फिर से किया जाए । जिसके बाद उन्होंने वापस से अपने रिसर्च शुरू कर दी और वो ये देखना चाहते थे कि एंटीकाथेरा मैकेनिजम के अंदर आखिर क्या है जिसके लिए रिसर्चर्स ने उसका x-ray करना चाहा लेकिन x-ray करने के लिए जिस मशीन की जरूरत थी वो कोई मामूली मशीन नहीं थी क्योंकि पूरी दुनिया में ये सिर्फ एक ही सबसे एडवांस मशीन थी जो इंग्लैंड में थी और एंटीकाथेरा मेकानिजम् था ग्रीस मे।



एक नाजुक आर्ट डिफेक्ट और बहुत ही पुराना होने की वजह से और टूट जाने के डर से उसे इंग्लैंड ले जाना मुमकिन नहीं था लेकिन रिसर्च भी रोकी नहीं जा सकती थी इसलिए वो बड़ी सी एक्सरे मशीन को इंग्लैंड से ग्रीस लाया गया जिसके बाद एंटीकाथेरा मैकेनिजम का एक्सरे किया गया ।

उसके बाद जो बात सबके सामने आई उसने पूरी दुनिया के होश उड़ा दिए । कई तरह के अलग अलग गियर्स और मेकेनिज्म उस एक्सरे में दिखाई दिए , और कड़ी रिसर्च करने पर उन्हें पता चला कि ये तकरीबन 2 हजार साल पुराना एक एडवांस्ड कंप्यूटर है जो उस समय के लोगों ने बनाया था । ये कंप्यूटर अलग अलग मैकेनिज्म की मदद से सोलर एक्लिप्स और दूसरे ग्रहों की जानकारी दे सकता था । इसके साथ ही इसमें कई तरह के अलग अलग लीवर और गियर्स थे जिसमें से हर एक अलग अलग ग्रह की जानकारी देने का काम करता था। 



इंजिनियर्स ने जब इस मैकेनिजम को देखा तो कहा कि आज के दौर में भी इस तरह का कोई भी मैकेनिजम बनाना काफी ज्यादा मुश्किल है और ये कंप्यूटर तो 2000 साल से भी पहले बनाया गया था जबकि हम लोग ये मानते आ रहे है कि साइंस और टेक्नोलॉजी कुछ ही साल पहले आई है। और दुनिया का पहला कंप्यूटर भी 19वीं सदी में बनाया गया था । तो फिर दो हजार साल पहले ऐसा कोई गजब के मैकेनिज्म वाला कंप्यूटर बनाना आखिर कैसे मुमकिन है। या फिर ऐसा हो सकता है कि इतने साल पहले ही इंसानों के पास ऐसी टेक्नोलॉजी थी जिससे यह कंप्यूटर बनाया गया था । अगर ऐसा है तो फिर इतने सालों तक ये टेक्नॉलजी कहां थी और आम लोगों तक क्यों नहीं पहुंची यह सोचने वाली बात है ।


इसे देख कर ऐसा साबित होता है कि हमारे पहले भी एडवांस्ड सिविलाइजेशन इस धरती पर मौजूद थी । लेकिन आखिर ऐसा क्या हुआ कि इतनी जबर्दस्त टेक्नोलॉजी इतने सालों पहले थी, लेकिन हमें इस टेक्नोलोजी का पता लगने तक यह टेक्नोलॉजी कहीं पे लुप्त हो गई क्योंकि सबसे पहला कंप्यूटर जो बनाया गया था वो एक रूम के साइज तक बड़ा था और 14 सेंचुरी में पहली घड़ी बनाई गई थी जो लगभग एक गाड़ी के साइज की थी । सच में जो मैकेनिजम आज के दौर में बनाना काफी मुश्किल है उसे दो हजार सालों पहले बनाया गया है , तो जरूर उन लोगों के पास कुछ बहुत ही जबरदस्त और बेहतरीन टेक्नोलॉजी रही होगी । वही कुछ लोगों का कहना है कि ये कॉन्फ्लिक्ट मैकेनिजम उस ज़माने में कोई इंसान नहीं बना सकता बल्कि यह एलियंस का बनाया हुआ डिवाइस है । लेकिन ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि ऐसे प्राचीन आर्टिफिशियल को एलियंस के नाम के साथ जोड़ा गया है । ऐसा पहले भी हो चुका है ।


1912  में विल्फ्रेड भीन्च नाम के एक बुक डीलर थे जो अपने किसी काम से इटली गए थे । वहां उन्होंने एक पुरानी और रहस्यमयी किताब खरीदी जिस का ना तो कोई टाइटल था और ना ही उस बुक के लिखने वाले का नाम था । उस बुक में कई सौ पेजेस थे जिसमें अलग अलग डायग्राम्स और पिक्चर्स थे , और उन पिक्चर्स के आसपास एक अजीब सी भाषा में कुछ लिखा हुआ था जो आम भाषा से काफी अलग थी । विल्फ्रेड उस भाषा को समझने की कोशिश करते रहे । साथ ही में वो ये भी पता लगा रहे थे कि ये वो कब कहा और किसने लिखी थी और आखिर इसमें लिखे हुए शब्दों का मतलब क्या है । विल्फ्रेड ने कई सालों तक इस बुक
की language को डिकोड करने की कोशिश की लेकिन उनके हाथ कुछ भी नहीं लगा । उन्होंने इस बुक के बीच अपनी पूरी जिंदगी लगा दी और थर्टी में विल्फ्रेड की मृत्यु हो गई । लेकिन इस बुक के बारे में उन्हें कोई भी जानकारी नहीं मिली जिसके बाद इस बुक का नाम विल्फ्रेड के नाम पर vinitch manuscript रखा गया । फिर कई सालों बाद कई सारे scriptographers उस बुक की भाषा और उसमें क्या लिखा हुआ है ये पता लगाने की कोशिश करने लगे । क्रिप्टोग्राफी उसे कहा जाता है जो हर तरह के बोले जाने वाली या लिखे जाने वाली नई पुरानी सभी भाषाओं के एक्सपर्ट होते है । पहले और दूसरे विश्व युद्ध के दौरान भी कई अमेरिकन और ब्रिटिश क्रिप्टोग्राफी ने इस बुक को समझने और डिकोड करने की कोशिश की लेकिन फिर भी उनके हाथ कुछ भी नहीं आया । क्रिप्टोग्राफी के इतिहास की यह सबसे रहस्यमयी और अनसुलझी किताब बन गई । जब कोई भी क्रिप्टोग्राफी उस बुक को डिकोड नहीं कर पाया तो उन्होंने कंप्यूटर क्रिप्टोग्राफी की मदद ली जिसमें दुनिया की हर एक नई से नई और पुरानी से पुरानी भाषा और कोड्स फीड किए हुए थे लेकिन इसके बावजूद भी उसे कोई फर्क नहीं पड़ा क्योंकि कंप्यूटर में भी ऐसा कोई कोडिया भाषा नहीं थी जो उस किताब से मैच हो जिसके बाद क्रिप्टोग्राफार्स और एनालिस्ट इस नतीजे पर पहुंचे कि ये ह्यूमन हिस्ट्री में पाई गई सभी भाषाओं में से कोई भाषा नहीं है और ये कभी भी कहीं लिखी या सुनी नहीं गई है । जिसके बाद उन्होंने ये भी कहा कि या तो ये कोई ऐसी भाषा है जो कई हजार साल पहले बोली जाती थी या फिर इसको डिकोड करने का तरीका बेहद ही अलग है जो हमें पता नहीं । जो ऐसे ही देखने पर पढ़ा नहीं जा सकता क्योंकि आज तक जितनी भी प्राचीन भाषाएं मौजूद हैं उनमें से लगभग सभी को डिकोड करने में कंप्यूटर कामयाब रहा है । लेकिन इस बुक के सामने कंप्यूटर भी फेल हो गया । बुक को देखते हुए रिसर्चर्स का ये भी कहना है कि हो सकता है कि इस बुक में कोई ऐसी खास जानकारी लिखी हुई हो जो बहुत ही ज्यादा इम्पोर्टेन्ट है जिसकी वजह से इस बुक के लेखक ने इसे इस तरह लिखा कि इसे हर कोई नहीं पढ़ सकता । जब इस बुक पर और ज्यादा रिसर्च की गई तो पता चला कि ये बुक 14 सेंचुरी में लिखी गई थी । उस समय क्रिप्टोग्राफी काफी ज्यादा पसंद थी लेकिन 14वीं शताब्दी में बोली जाने वाली उन भाषाओं से ये भाषा जरा भी मेल नहीं खाती । आज भी कई सालों बाद वही स्क्रिप्ट को कोई भी डिकोड नहीं कर पाया है। लेकिन उस बुक में कई सारे ऐसे drawings है जो आज के समय के चीजों से मिलते जुलते है । जैसे पौधे सब्जी वगैरा । लेकिन ये बात भी दावे के साथ नहीं कही जा सकती क्योंकि उस बुक में और भी कई drawings है बिल्कुल हमारे स्पेस की गैलेक्सी से मिलती है । एक और ड्रॉइंग भी है जो एक plant सेल की तरह से दिखती है लेकिन गैलेक्सी को आमतौर पर अगर देखना चाहे तो उसके लिए टेलिस्कोप की जरूरत पड़ती है और plant सेल को देखने के लिए माइक्रोस्कोप की, जबकि उस वक्त ना टेलिस्कोप इनवेस्ट हुआ था और ना ही माइक्रोस्कोप इन्वेस्ट किया गया था । तो ये कैसे हो सकता है कि उस बुक में पहले से ही ऐसे drawingsहै जो बिल्कुल ही गैलेक्सी और plant सेल से मिलती है।


दोस्तो क्यासा लगा हमारे आजके blog कमेन्ट जरूर करना। 



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