राष्ट्रीय़ आदेशानुसार ‘आम्रपाली’ बनी थी वेश्या। ambapali



 आम्रपाली (amrapali) एक त्रुटिहीन सौंदर्य थी;  लगभग 2,500 साल पहले राज्य ने शहर की दुल्हन य़ा वेश्या(prostitute) बनाय़ा था।


स्वाद के मामले में 'आम्रपाली' आम कई लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय़ है।  आकार में छोटा लेकिन मिठास के मामले में, ऐसा लगता है कि सभी आमों को 'आम्रपाली' ने पीछे छोड़ दिय़ा है।  लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस आम को इसका नाम कहां से मिला?

आम्रपाली का जन्म आज से 2,500 साल पहले भारत में हुआ था।  वह उस समय़ की सबसे अच्छी सुंदरता (beautiful) और नर्तकी(dancer) थी।  उसकी शक्ल पर पूरी दुनिय़ा पागल थी और यह सूरत उसके लिए शार्प हो गई।  यही कारण है कि वह इतिहास में एकमात्र महिला थी जिसे राज्य के आदेश से वेश्या बनाय़ा गय़ा था!

आम्रपाली वैशाली शहर में रहती थी।  वैशाली प्राचीन भारत में एक लोकतांत्रिक(republican) शहर था, जो अब भारतीय़ राज्य बिहार का हिस्सा है।
महानमन नाम के एक व्यक्ति ने आम्रपाली को एक आम के पेड़ के नीचे एक बच्चे के रूप में पाय़ा।  यह अज्ञात है कि उसकि आसली मा वाप कोन है। वह एक आम के पेड़ के नीचे पाय़ी गय़ी है, इसलिए उसे आम्रपाली नाम दिय़ा गय़ा है।  संस्कृत में आम्र का मतलब होता है आम और पल्ब का पत्ता।  यानी आम के पेड़ के युवा पत्ते।

लेकिन जैसे ही उन्होंने अपना बचपन गुजरा और किशोरावस्था में प्रवेश किय़ा, आम्रपाली को लेके धुम मचगय़ा।  उनके लुक्स की वजह से उनके आसपास के सभी लोग पागल हो गए।  देश और विदेश के राजाओं से लेकर आम लोग उसके लिए लगभग पागल हो गए।  विभिन्न स्थानों से संघर्ष, झगड़े और विवाद की खबरें आने लगीं।  हर कोई उसे एक नज़र देखना चाहता है, शादी करना चाहता है।  इस बात से आम्रपाली के माता-पिता बहुत चिंतित हो गए।  उन्होंने फिर वैशाली के सभी गणमान्य लोगों को एक समाधान के साथ आने के लिए कहा।  क्योंकि, हर कोई आम्रपाली से शादी करना चाहता है।  तब वैशाली के सभी शक्तिशाली और अमीर लोग एक बैठक में बैठे और विभिन्न चर्चाओं के बाद फैसला किय़ा कि कोई भी आम्रपाली से शादी नहीं कर सकता।  उसके रूप के कारण।  वह किसी की अकेली नहीं हो सकती।  आम्रपाली होंगे सभी लोगोके। वह एक शहर दुल्हन होगी, जिसका अर्थ है सीधे हिन्दी में एक वेश्या।

य़ह एक ऐतिहासिक फैसला था।  इतिहास में ऐसा बहुत कम होता है कि किसी को राज्य के ऐसे फैसले में वेश्या बनाय़ा गय़ा हो!  आम्रपाली ने उस बैठक में पाँच शर्तें रखीं-

(१) उनका घर शहर की सबसे खूबसूरत जगह में होगा।
(२) उसकि मूल्य प्रत्येक रात के लिए पाँच सौ सोने के सिक्के होंगे।
(३) एक समय़ में केवल एक ही व्यक्ति अपने घर में प्रवेश कर सकता है।
(४) किसी शत्रु य़ा अपराधी की तलाश में, यदि आवश्यक हो, तो सप्ताह में एक बार उसके घर में प्रवेश किय़ा जा सकता है।
(५) इस बात की कोई जाँच नहीं की जा सकती कि कौन उसके घर आय़ा और कौन गय़ा।

सभी ने उसकी शर्तों को मान लिय़ा।  इस प्रकार दिन-प्रतिदिन आम्रपाली विशाल धन की मालिक बन गई।  उनकी सुन्दरता के खबर भी देश और विदेश में अधिक से अधिक फैलने लगे।

बिम्बिसार (Bimbisar) प्राचीन भारत में मगध राज्य के राजा थे।  सुना है कि उनकी पत्नी की संख्या 500 थी!  नर्तकियों के एक नृत्य कार्यक्रम में, उन्होंने एक नर्तकी को नाचते हुए देखा , और कहा कि यह नर्तक दुनिया में सर्वश्रेष्ठ है।
तब उनके एक दरबारी ने कहा- महाराज, यह नर्तकी आम्रपाली के नाखून के योग्य नहीं है!
बिम्बिसार को इस वात पर ध्यान गय़ा।  उन्होंने उन सभाओं से आम्रपाली के बारे में विवरण सुना और उनके निकट आने की कामना की।
लेकिन उनके दरबारियों ने कहा कि यह संभव नहीं था।  क्योंकि, तब हमें वैशाली साम्राज्य से लड़ना और जीतना है ,और आम्रपाली से मिलना इतना आसान नहीं है।  देश-विदेश के कई राजाओं सहित राजकुमारों ने आम्रपाली के महल के सामने उसकि बेसब्री से इंतजार करता है।  लेकिन अगर वह नहीं चाहती , तो वह किसी के सामने नहीं आती।

इतना सुनकर बिम्बिसार की दिलचस्पी और भी बढ़ गई।  उसने भेस वदलकर वैशाली राज्य जाने और आम्रपाली को देखने का फैसला किय़ा।  उन महिलाओं में क्या है जिनके लिए पूरी दुनिया पागल है!
फिर कई उतार-चढ़ाव के अंत में अपनी आम्रपाली से मिलने का अवसर आता है।  आम्रपाली का महल अमरकुंज में है।  लेकिन जब राजा उससे मिलने गय़ा, तो वह चौंका, इह कोई स्त्री नहीं है;  एक परी की तरह बैठी है!  यह किसी भी तरह से मानव नहीं हो सकती।  इतने रुप (beauty) मानव के क्येसे हो सकते हैं!
लेकिन कुछ ज्यादा ही आश्चर्यचकित राजा का इंतजार कर रहा था।  क्योंकि, आम्रपाली ने उन्हें पहली नजर में मगध राज्य के राजा के रूप में पहचाना और कहा- वे लंबे समय से उनके प्यार में डूब रहे हैं।
यह सुनकर राजा को बड़ा आश्चर्य हुआ।
राजा ने तुरंत उसे अपने राज्य की रानी बनाने की पेशकश की।  लेकिन आम्रपाली ने कहा कि उनके राज्य के लोग इसे कभी स्वीकार नहीं करेंगे।  इसके विपरीत, कई जीवन खो जाएंगे।  खुन-खराबि होगा।  इसलिए उसने राजा से कहा कि जल्दी से जल्दी लट याय़।
लेकिन बिम्बिसार वैशाली पर हमला करके आम्रपाली को प्राप्त करना चाहता है।  इस बीच, आम्रपाली अपने राज्य के लिए कोई नुकसान नहीं चाहती है।  इसलिए उसने राजा को अपने राज्य में वापस भेज दिय़ा और य़ह स्पष्ट कर दिय़ा कि वह वैशाली पर किसी भी हमले को स्वीकार नहीं करेगी।

इस बीच, बिम्बिसार के बेटे अजातशत्रु को भी आम्रपाली से प्यार हो गय़ा था।  उसने बिम्बिसार पर कब्जा कर लिय़ा, खुद सिंहासन को जब्त कर लिय़ा और आम्रपाली को हासिल के लिए वैशाली राज्य पर आक्रमण कर दिय़ा।  लेकिन कब्जा नहीं कर पाय़ा और बुरी तरह घायल हो गय़ा।  आम्रपाली की सेवा में ठीक होने के बाद, वह चुपके से अपने स्वय़ं राज्य में लौट आय़ा।  उसी दिन, आम्रपाली ने विनम्रतापूर्वक आजातशत्रु के विवाह प्रस्ताव को वापस कर दिय़ा।

इतने नाटक के बाद आखिर हुआ क्या?  


गौतम बुद्ध का समय़काल था।  गौतम बुद्ध अपने सैकड़ों साथियों के साथ वैशाली आए।  एक दिन आम्रपाली को वैशाली राज्य मे एक युवा बौद्ध भिक्षु नजर  आई।  उसने सोचा, देश-विदेश के राजा मेरे चरणों में आकर बसते हैं ,और य़ह तो सामान्य मानब है।  उन्होंने गौतम बुद्ध से उस भिक्षु को चार महीने तक अपने पास रखने का अनुरोध किया।  सभी ने सोचा कि बुद्ध कभी सहमत नहीं होंगे।  क्योंकि, एक साधु ऐसी वेश्या के साथ रहेगा;  यह नहीं हो सकता।  लेकिन गौतम बुद्ध उसे रखने के लिए सहमत हो गए और यह भी कहा, मुझे श्रमण की आँखों में कोई कामना (physical relationship) नहीं दिखता (श्रमण युवा भिक्षु का नाम था)।  यहां तक ​​कि अगर वह चार महीने तक रहता है, तो वह निर्दोष वापस आ जाएगा - यह सुनिश्चित है!

चार महीने हो गए।  गौतम बुद्ध अपने साथियों के साथ निकलेंगे।  युवा श्रमण की कोई खबर नहीं है।  क्या श्रमण आम्रपाली के रूप में हार गए?  उस दिन सभी को आश्चर्यचकित करते हुए, युवा श्रमण वापस आ गया।  उसके पीछे एक महिला आई।  वह महिला आम्रपाली थी।  आम्रपाली ने बुद्ध को बताया कि उन्होंने युवा श्रमण को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।  लेकिन यह पहली बार है जब वैशाली की शहर दुल्हन आम्रपाली किसी पुरुष को वश में करने में असफल रही है।  इसलिए आज वह सब कुछ छोड़ना चाहती है और बुद्ध के चरणों में शरण चाहती है।

सब कुछ दान करने के बाद, अपना शेष जीवन इतिहास प्रसिद्ध महिला आम्रपाली ने गौतम बुद्ध के चरणों में व्यतीत किय़ा।

सन् 1978 मे भारतीय़ आम गबेषकों (research) ने ‘दशेहरि’ अर ‘निलाम’ इह दो आम को मिक्स (mix) करके एक न्ए आम बनाय़ा था, अर नाम रखा था “आम्रपाली”।



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